मंदिर जाने के यें चमत्कारी लाभ जानकर अब विज्ञान भी हुआ नतमस्तक.. मानी ये बात..

सनातन धर्म में मंदिरों में भगवान की प्रतिमा को स्थापित किया जाता है. इसके बाद भगवान की विधिविधान से पूजा की जाती है. मंदिर में हर तरह के लोग पूजा करने के लिए आते है. कई बार सवाल मन में उठ जाता है कि आखिर क्यूँ मंदिर में ही पूजा की जाती है, इससे क्या फायदा होते है.

ज्यादातर लोग अपने कार्य की सिद्धि के लिए भगवान को अरदास लगाते है। इसके साथ साथ मंदिर जाने से कुछ चमत्कारी लाभ ही होते हैं। जिन्हें अब विज्ञान भी मानने लगा है। चलिए आपको बताते है कुछ इन्ही चमत्कारों के बारे में!

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मंदिर में भगवान की विधिविधान पूजा अर्चना करने से सबसे ज्यादा मन को शांति मिलती है. दरअसल भागती जिंदगी में तरह तरह की समस्याओ को झेलते झेलते हम परेशान हो जाती है, मन बेचैन रहने लगता है. पर जब हम मंदिर में भगवान की मूर्ति के सामने नतमस्तक होकर प्रार्थना करते हैं, तो हमारे मन को अनुपम शांति मिलती है। जिससे हमारे मन में बुरे विचार नहीं आते।

दूसरा जब हम मंदिर में लगी घंटी और शंख की आवाज सुनते है तो घंटी से निकलने वाली ध्वनि हमारे मस्तिष्क की दाईं और बाईं तरफ से एकरूपता बनाती है। घंटी की टन्कार हमारे शरीर के सातों आरोग्य केंद्रों को क्रियाशील करती हैं।

मंदिरों की बनावट ज्यादातर गुंबद के आकार की होती है, जिनमें मंत्रोच्चारण के स्वर और अन्य ध्वनियां गूंजती है। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जाओ का आगमन होता है. अक्सर हम मंदिरों में प्रवेश करते हुए जुत्ते चपलो को निकाल देते है, बता दें कि यह भी एक प्रकार का व्यायाम हैं।

नंगे पैर घूमने से पॉजिटिव एनर्जी हमारे शरीर में प्रवेश करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार नंगे पैर घूमना हमारे लिए एक्यूप्रेशर का काम करता है। इससे हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहता है। माथे पर तिलक लगाना हमारे सोच को एक जगह पर ध्यान केन्द्रित होता है जिससे कार्य में मन लगा रहता है और साथ में तनाव भी दूर होता हैै.

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मंदिरों का महक भरा वातावरण हमारे मस्तिस्क में शालीनता लाता है, जिससे हम अच्छा महसूस करते है, हमारे अन्दर सकारात्मक उर्जाओ का आगमन हो जाता है.

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