भारत से उलझने के ख़्वाब देखने वाले चाइना के होने वाले हैं सात टुकड़े, वजह जान कर रह जाएँगे दंग

नई दिल्ली: चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के आपसी मतभेदों की वजह से संभावना है कि चीन का विभाजन शीघ्र ही होने वाला है।कम्युनिस्ट पार्टी के तीनों ही गुट शत्रुता की गहराई में प्रवेश कर रहे हैं। और यही हालात रहे तो संभावना है कि आने वाले महीनों में यह कलह अपना असीम रूप धारण कर सकता है  

यह एक नई क्रांति को आवेदन देगा जिसके फलस्वरूप चीन का सात अलग-अलग स्वतंत्र क्षेत्रों में विभाजन होने से कोई नहीं रोक सकता। जिआंग जेमिन, हू जिंताओ तथा राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा नेतृत्व किए जाने वाले शंघाई गुट, बीजिंग गुट तथा झेंगियांग गुट सभी एक गुप्त युद्ध के प्रतिद्वंद्वी हैं, और तीनों ही गुट अपने गंदे राजनीतिक खेल में एक-दूसरे को ध्वस्त करने की कोशिश कर रहे हैं।

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जबकि वास्तव में इस पूरे घटनाक्रम का कारण वर्तमान शासन है जिसमें लोकतंत्र नाम की कोई वस्तु जीवित नहीं है तथा ना ही किसी को अपने विचार व्यक्त करने की आजादी।यह कारण शायद ही किसी अत्यधिक-सेंसर वाले राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में उल्लेख हो।

जासूस और विश्लेषक चीन में इस बढ़ती हुई अशांति पर गहरी नजर रखे हुए हैं जिससे उन्हें अंदेशा है कि क्रांति की इस आग की तीव्रता अभी बढ़ने की आशंका है क्योंकि विपक्ष के खिलाफ अभूतपूर्व कार्रवाई और वकीलों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं के लापता होने से चीनी तटस्थ क्षेत्र में भारी अव्यवस्था पैदा हो रही है।

सूत्रों का कहना है कि “मीडिया पर क्रूर नियंत्रण करने के पश्चात चीन ने प्रांतों में सैकड़ों विरोध प्रदर्शनों की खबरों को मूक करने में कामयाबी हासिल कर ली है। लेकिन कुछ भूमिगत कार्यकर्ताओं ने हमें पहले ही यह शी जिनपिंग के विरुद्ध योजना की खबर दे दी थी।

सूत्रों का यह भी कहना है कि “चीन अंततः अपने अंतिम चरण तक पहुंच रहा है और झिंजियांग, मांचुरिया, हांगकांग, तिब्बत, चेंगदू, झांगज़ुंग और शंघाई इस चीनी क्रांति के बाद मुक्त राष्ट्रों में बदल सकते हैं।”उन्होंने यह भी कहा कि चीनी सरकार राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सर्मथन में रैली निकालने के लिए डोकलम व उत्तरी कोरिया के अमेरिका के खिलाफ परमाणु हमले करने जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करके बैठी है।

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प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील टेंग बियाओ ने न्यूयॉर्क से “द संडे स्टैंडर्ड” अखबार को बताया कि चीन अपनी गतिरोध बढ़ रहा है और जिनपिंग अपने लगभग विलुप्त समर्थन आधार को एक बार फिर से स्थापित करने के अवसर खोज रहा है।

 

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