घर पर खाली न बैठें, इस तरह अचार बेचकर आप भी कमा सकते हैं करोड़ों रुपए

कोई भी काम छोटा नहीं होता और काम करने के लिए पढाई की डिग्री मायने नहीं रखती! जी हाँ, ये सच है और यही बात बड़े बड़े बिजनेसमैन ये कई बार साबित कर चुके हैं। वहीं गुड़गांव की रहने वाली अनपढ़ कृष्णा यादव ने इसे फिर से साबित किया है और दिखा दिया है कि असली ज्ञान तो अनुभव व हुनर से आता है। इस बात को कृष्णा यादव ने साबित किया है कि बेशक आप अनपढ़ है, यदि आपके अंदर कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो आपको कोई नहीं रोक सकता।

व्यावसायिक सफलता के मामले में आज के समय में कृष्णा यादव अच्छे-अच्छे पढ़े लिखों को मात दे रही हैं। हमारे समाज की सोच है कि महिलाओं को आगे बढने के घर से बाहर निकलना जरूरी है। मगर जब आप कृष्णा यादव की कहानी पढ़ेंगे तब आपको यकीन होगा कि व्यवसाय के मामले में ग्रहस्थ महिलाएं भी किसी से कम नहीं है। गुडगाँव की कृष्णा यादव की यह कहानी बुहत सी ग्रहस्थ महिलाओं के लिए प्रेरणादायक हो सकती है। बेशक वो महिलाएं शिक्षित हों या नहीं!

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बता दें कि गुड़गांव की कृष्णा यादव ने अपने एक छोटे से कमरे में मात्र 3000 रुपये से अचार बनाने का काम शुरु किया था। लेकिन आज वे 4 लघु इकाइयां चला रही हैं, जिनमें अचार से जुड़े 152 उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इस अचार के व्यवसाय से कृष्णा सालाना लगभग 2 करोड़ रूपए कमा रही हैं। साथ ही अब कृष्णा कामयाबी के उस शिखर पर पहुंच गई हैं जहां वह 100 से ज्यादा महिलाओं को रोज़गार दे रही हैं।

कृष्णा यादव और उनके पति किसी कारणवश 1995-96 में यूपी से हरियाणा के एक गांव में आकर बस गए थे। उस समय दोनों के पास कोई रोज़गार नहीं था, जिसके कारण इन्होंने थोड़ी सी जमीन पर सब्जी उगानी शुरू की। 2001 के दौरान कृष्णा ने कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा में खाद्य प्रसंस्करण तकनीक का तीन महीने का प्रशिक्षण लिया और अपने ही खेत की सब्जी से अचार बनाने का काम शुरु किया।

शुरुआत में कृष्णा ने तीन हजार रुपए का निवेश किया, जिससे उन्होंने 100 किलो करौंदे का अचार और पांच किलो मिर्च का अचार तैयार किया। इसे बेच कर उन्हें 5250 रुपए का लाभ हुआ। फिर कृष्णा ने लगातार अचार बनाना तो शुरु कर दिया, मगर अब उनके सामने मार्केटिंग की दिक्कत आ गई। तब कृष्णा ने सेल्फ मार्केटिंग करनी शुरू की और सड़क पर ही अचार बेचना शुरू कर दिया। कृष्णा के अचार की गुणवत्ता बेहद अच्छी होने के कारण धीरे-धीरे लोगों ने भी अचार खरीदना शुरु कर दिया।

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आज के समय कृष्णा किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज देकर खुद सब्जियां उगवाती हैं। बाद में उन्हीं सब्जियों का इस्तेमाल अचार बनाने के लिए किया जाता है। कृष्णा को इस काम में इतनी ऊंचाई पर पहुंचने की वजह से आईसीएआर द्वारा दिए जाने वाले एनजी रंगा कृषि अवार्ड से साल 2014 में कृष्णा को नरेंद्र मोदी द्वारा नवाज़ा जा चुका है। यही नहीं पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा भी कृष्णा को कई ढेरों प्रकार के कृषि पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

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