किन्नरों की शव यात्रा के बारे मेंं ये हैरान कर देने वाली बातें जान आप भी चौंक उठेंगे…

किन्नरों से वैसे तो हम हमेशा दूर भागते है. जब वह आपके पास आ जाते है और आप से बात करने लगते है तो हम लोगो को बेहद शर्म महसूस होती है. जो की अगर देखा जाये तो काफी गलत है. वे भी इस समाज का हिस्सा है और दुनिया में हमारी तरह ही जन्में है. यह भगवान् ही है जिसने हर आदमी को बनाया है, इसीलिए उसकी बनाई चीजों से शर्म महसूस करना काफी गलत है. कई विकसित देशो ने इसे एक श्रेणी का दर्जा दे दिया है. और भारत भी उन्ही देशो में से एक है.

आपको बता दे की किन्नरों की दुनिया एक अलग तरह की दुनिया होती है. ये हमारे समाज में तो रहते हैं लेकिन हम इनके बारे में सबकुछ ना तो जानते है और ना ही जानना चाहते है. ये भी अजीब बात है कि आज तक किसी ने भी किन्नारों पर ज्यादा शोध भी नहीं किया है।

Source : www.namanbharat.com

आंकड़े बताते हैं कि भारत में आज के समय में करीब बीस लाख से ज्यादा किन्नर है. लेकिन इनकी संख्या दिन प्रतिदिन ना जाने क्यों घटते ही जा रही है। आप को बता दे की किन्नरों के बारे में बताया जाए तो उनमें कई ऐसी प्रकार की रस्में हैं. जो आज के दिन भी भी हमारे समाज में मौजूद हैं, जैसे कि हिंजड़ों की शव यात्राएं आज भी रात्रि में निकाली जाती है।

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शव यात्रा को उठाने से पूर्व जूतों-चप्पलों से उसे पीटा जाता है। ये भी माना जाता है कि दीवार तोड़कर तथा शव को घसीट कर निकला जाता है। माना जाता है की किन्नर के मरने के उपरांत पूरा हिंजड़ा समुदाय एक सप्ताह तक भूखा रहता है। एक वर्ग इन्हें भ्रांतियों भी मानता है। और इस संबंध में किन्नर का दूसरा वर्ग भी इन रस्मों से इंकार तो नहीं करते।

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भारत के किन्नरों के इस दर्दनाक जीवन की अकांक्षाओं, संघर्ष और सदस्यों की अनदेखी करना काफी ज्यादती होगी। बताया जाता है कि कुछ किन्नर जन्मजात होते है, लेकिन कुछ अपनी मर्ज़ी सेन इनमे शामिल हो जाते है।

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