हिन्दुओं को इसलिए नहीं खाना चाहिए लहसुन और प्याज, समझें इस रहस्य को!

अक्सर धर्म परायण हिन्दुओं को प्याज और लहसुन आदि से परहेज करते देखे जा सकता है। तर्क-कुतर्क करने वाले सोचते हैं कि भला इसके पीछे क्या कारण हो सकता है? और इस संबंध में अनेकों लोगों के अलग अलग मत और कारण हैं। मगर प्याज और लहसुन का सेवन धार्मिक मान्यता के चलते तो अवैध होता ही है, साथ साथ इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण भी होते हैं।

बता दें कि प्राचीन समय से ही प्याज और लहसुन तथा अन्य ऐलीएशस (लसुनी) पौधों को राजसिक और तामसिक रूप में वर्गीकृत किया गया है। इनका मतलब है कि ये जुनून और अज्ञानता में वृद्धि करते हैं। वहीं साथ ही अहिंसा – हिंदू धर्म में, हत्या (रोगाणुओं की भी) निषिद्ध है। मगर ये दोनों पौधे धरती के अंदर सूक्ष्मजीवों की मौत का कारण बनते हैं। इसलिए ये मान्यता भी प्याज़ और लहसुन को धर्म परायण हिन्दुओं के लिये निषेध बनाती है।

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क्या कहते है शास्त्र – 

इस बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि मांस, प्याज और लहसुन का अधिक मात्रा में सेवन व्यवहार में बदलाव का कारण बन सकता है। वहीं हिन्दू शास्त्रों के अनुसार लहसुन, प्याज और मशरूम हिन्दुओं के लिए निषिद्ध हैं, क्योंकि आमतौर पर ये अशुद्धता बढ़ाते हैं और अशुद्ध खाद्य की श्रेणी में आते हैं।

हिन्दुओं में भी मुख्यत: ब्राह्मणों को पवित्रता बनाए रखने की जरूरत होती है, क्योंकि वे देवताओं की पूजा करते हैं जोकि प्रकृति में सात्विक (शुद्ध) होते हैं। इसलिए ही मन्दिर के पुजारी आम तौर पर इनका परहेज करते हैं। एक क्षत्रिय योद्धा को भी शुद्धता की जरूरत होती है, ठीक इसी तरह धर्म परायण वैश्य और शुद्र भी इनका परहेज करते हैं।

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बता दें कि सनातन धर्म के वेद शास्त्रों के अनुसार भी प्याज और लहसुन जैसी सब्जियां प्रकृति प्रदत्त भावनाओं में सबसे निचले दर्जे की भावनाओं जैसे जुनून, उत्तजेना और अज्ञानता को बढ़ावा देती हैं, जिस कारण अध्यात्मक के मार्ग पर चलने में बाधा उत्पन्न होती हैं और व्यक्ति की चेतना प्रभावित होती है। अत: इस कारण इनका सेवन नहीं करना चाहिेए।

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