आरक्षण पर छलका एसपी का दर्द – “मैं IPS और मुझसे कम रैंक वाला IAS”

भारत आज तरक्की की सीढ़ी पर सबसे ऊची वाली मंजिल पर बैठा है. हमारे देश में इतनी तेज़ी से आधुनिकरण आ रहा है कि दुनिया के प्रमुख बैंक जैसे – वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक तथा अन्य बैंको की माने तो भारत 2028 तक दुनिया की सबसे तगड़ी अर्थव्यव्स्था बन जायेगा और बाकी सारे देश इस से पीछे होंगे.

लेकिन हम आजादी के इतने सालो पीछे भी आरक्षण पर अटके हुए है. हमारा ऐसा कहना गलत होगा की आरक्षण को झट से खत्म कर दे. क्यूंकि काफी जाति आज भी गरीब है और उन्हें इसकी जरूरत है. लेकिन यह आरक्षण उन्हें कोई सफलता नही दे रहा है. आरक्षण का फायदा वह लोग उठा रहे है जो गरीबी से बहुत ऊपर आ चुके है.

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आज भारत को धर्म के अलावा एक और चीज़ ने बाँट दिया है, और उस खूखार चीज़ का नाम है आरक्षण. गरीब का बच्चा आज भी गरीब है और उसने आरक्षण के नाम के बारे में तो सुना ही नही होगा. कुछ अमीर लोग इसका निरंतर फायदा उठा रही है.

आज के दिन एक होनहार बच्चे को नौकरी न मिलकर एक दुसरे बच्चे को मिल रही है. जिसकी क्षमता उस होनाहर बच्चे से बहुत कम है. देश को आजाद हुए आज बहुत साल हो गए पर इस आरक्षण की बेड़ियों से देश आज भी आजाद नही है. आरक्षण को आज के दिन गरीबी के हिसाब से देना चाहिए ना की जाति के हिसाब से. और एक ऐसी ही कहानी आज हम आपको बतायेंगे जो इस आरक्षण का शिकार हो चुकी है.

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मध्यप्रदेश के रहने वाले एक एसपी ने बताया कि मैं और मेरा दोस्त दोनों आई.ए.स सेवाओं की तैयारी कर रहे थे. हम दोनों निरंतर पढाई करते थे एक साथ. उसने बताया की मैने उससे थोडा ज्यादा घंटो तक पढाई की वह सो जाता था. पर मैं रात-रात को जगा रहता था. जब परिणाम आया तो मेरी रैंक 141 आयी और मेरे दोस्त की रैंक 456 आयी. लेकिन उसे तो उसकी मनचाही पोस्ट मिली लेकिन मुझे आई.पी.एस की पोस्ट मिली. तो आप ही बताये गलती किसकी है.

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