डेरा समर्थकों के आगे पीठ दिखा भागे पुलिसकर्मी, मगर इस शेरनी ने पंचकूला को बचाया

25 अगस्त को जैसे ही सिरसा डेरे के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बलात्कार के केस में दोषी करार दिया गया वैसे ही डेरे के अनुयायियों ने उत्पात मचाना शुरू कर दिया। इस पंचकूला हिंसा के दौरान हरियाणा पुलिस की मर्दाना छवि सभी देशवासियों के समक्ष स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हुई क्योंकि शुक्रवार को सिरसा डेरा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम की सजा के बाद शहर के स्थानीय संरक्षक अपनी पीठ दिखाने वाले पहले सुरक्षाकर्मी ही थे।

डेरा समर्थकों के पूरे प्रदेश में आगजनी करने के पश्चात, 2009 बैच की आईएएस अधिकारी- पंचकूला की उपायुक्त “गौरी पराशर जोशी” ने स्वयं घटनास्थल पर पहुँचकर स्थिति का ब्यौरा लिया। पुलिसकर्मी आंदोलनकारियों को शांत करने की कोशिश कर रहे थे परंतु जवाब में आंदोलनकारी लाठी व पत्थरों की सहायता से पुलिसकर्मियों को हानि पहुँचाकर आगे बढ़ने लगे। अंत में गोरी के नेतृत्व में सेना ने घटनास्थल से डेरा के गुंडे अनुयायियों को खदेड़ दिया।

11-माह से बनी मां “गोरी पराशर जोशी”

जैसे-जैसे हिंसा बढ़ती गई, अकेले पीएसओ के साथ खड़ी महज 11-माह से बनी मां “गोरी पराशर जोशी” के चोट लगने के साथ कपड़े तक फट गए मगर वो डरी नहीं। वह अपने कार्यालय में गई तथा स्थिति को स्थिर अवस्था में लाने के लिए सेना को आदेश दिया कि कहीं यह आंदोलनकारी एक विशालरूप न धारण कर ले और स्थिति बद से बदतर न हो जाए।

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पंचकूला के स्थानीय निवासी सतींदर नांगिया कहते है कि अगर उस दिन सेना को समय पर निर्देश नही मिलते तो आवासीय क्षेत्र में अभूतपूर्व विनाश होता। पिछले कुछ दिनों से स्थानीय लोग पुलिस की चाय और बिस्कुट के साथ सेवा कर रहे थे, परंतु जब डेरे के अनुयायियों ने उत्पात मचाना प्रारंभ किया तो सबसे पहले स्थानीय पुलिस ही दबे पाँव मैदान छोड़ कर भाग गई। मगर गोरी पराशर ने इस दौरान हिम्मत का परिचय दिया।

दंगे के बाद देखा सब जगह स्थिति नियंत्रण में है, तब घर जाने का फैसला लिया

सुश्री गौरी पराशर जोशी ने शहर के हर जगह और कोने में स्वयं यह देखते हुए कि दंगे के बाद सब जगह स्थिति नियंत्रण में है, तब उन्होंने घर जाने का फैसला लिया। उस रात वह 3 बजे अपने घर पहुँची। बता दें कि उन्होंने ओडिशा के कालाहांडी के नक्सल प्रभावित जिले में काम किया हुआ है और उनके पति बालाजी जोशी भी एक नामी अधिकारी हैं। शायद उसी तजुर्बे की वजह से उन्हें हरियाणा के इस मामले से निपटने में मदद मिली हो।

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बट्टी नांगिया की आखों के सामने कुछ मीटर दूरी पर सेना ने दो अनुयायियों को गोली मार दी, जो कि स्थानीय घरों में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे, बट्टी कहती हैं कि, “अब समय आ गया है कि हरियाणा जैसे पितृसत्तात्मक राज्य के लोग जहाँ कम लिंग अनुपात हैं, गोरी पराशर जोशी जैसी महिला से सबक ले।”

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