30 की उम्र पार महिलाओं को इन बीमारियों के संकेतों को जरुर पहचानना चाहिए..

इसलिए डॉक्टर हर उम्र में कुछ दवाई तथा इंजेक्शन लगाते रहते है ताकि मानव का शरीर उस समय की बीमारियों से लड़ता रहे. वह दवाई अक्सर उस समय हो रही बीमारियो से लड़ने की ताकत देती है. इसलिए वह बेहद आवश्यक है.

कहते है 20 से लेकर 30 की उम्र में मानव का शरीर काफी बेहतर और ताकतवर होता है. लेकिन उसके बाद यानी 30 के बाद शरीर बदलने लगता है. इस उम्र से पहले तक बीमारिया कमज़ोर होती हैं और शरीर ताकतवर होता हैं. लेकिन इस उम्र के बाद शरीर कमज़ोर हो जाता है और बिमारियां आदमी को सताने लगती है.

आज हम आपको कुछ बीमारियों के बारे में बतायेंगे जिससे 30 की उम्र में आप इनसे सुरक्षित रहे…

1. स्तन कैंसर

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यह देखा गया है कि 30 की उम्र पार करने के बाद महिलाओ के स्तन में गाठे बनने लगती है और इस उम्र में स्तन कैंसर फैलने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए अगर किसी महिला के स्तन में बेवजह दर्द होने लग जाये तो जल्द से जल्द उसकी जांच कराये.

2. थायरोइड

अक्सर हमारा शरीर एक हॉर्मोन भेजता है जो कि गले से निकलता है. जो आप को थायरोइड होने से बचाता है. लेकिन अगर आप पौष्टिक आहार लेना बंद कर देंगे तो यह हॉर्मोन बनना बंद हो जायेगा. माना जाता है की इस उम्र में ही इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है. इसका लक्षण यह है कि अगर कोई व्यक्ति इस बीमारी से जूझ रहा है तो वह अक्सर चिडचिड़ा हो जाता है.

3. सर्विकल कैंसर

यह दुनिया की बेहद खतरनाक बीमारियों में से एक है और इसके ज्यादातर केस भारत में ही मिलते है. भारत में हर दसवी महिला इसका शिकार हो जाती है. यह बीमारी पेपिलोमा वायरस के कारण होती है. इससे बचने का एक इलाज है कि आप सोते समय तकिया का इस्तेमाल न करे.

4. पीसीओडी

पीसीओडी यानीं पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम की वजह से शरीर में तेजी से हारमोन से जुड़े बदलाव होते हैं. जिस वजह से महिलाओं में अंडे पैदा करने और गर्भधारण के लिए गर्भाशय को  तैयार करने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. बता दें कि यह समस्या देश में प्रजनन आयु वाली करीब 10 प्रतिशत महिलाओं में पाई जाती है, इस  बीमारी में महिलाओं के शरीर में पुरुष हार्मोन एस्ट्रोजन का उत्पादन बढ़ने लगता है, इंसुलिन भी अधिक बनने लगता है.

5. एंड्रोमेट्रियॉसिस

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इस बीमारी के कारण महिला के गर्भाशय यानी यूट्रस की बाहरी परत बनाने वाला उत्तक यानी टिश्यू असामान्य रूप से बढ़कर शरीर के अन्य अंगों जैसे अंडाशय, फेलोपियन ट्यूब और अन्य आंतरिक अंगों तक फैल जाता है. इसके कारण पीड़ित महिला को पीरियड के समय ये टिश्यू टूट जाते हैं और इनमें घाव हो जाता है, और पीरियड के समय उन्हें असहनीय दर्द होता है.

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