हुआ ऐलान : चीन के खिलाफ भारत का साथ देगा अमेरिका

जिसके कयास लगाये जा रहे थे, अंत में वही बात सच साबित होती नजर आ रही है। भारत-अमेरिका-जापान तीनों देशों ने एक साथ सैनिक अभ्यास करने का फैसला किया था तो चीन समेत तमाम भारत विरोधी देश सदमे में नजर आ रहे थे। पिछले कुछ समय में अमेरिका से भारत की नजदीकी के कारण ही चीन की बौखलाहट बढ़ गई है, तो अभ्यास के बाद तो नींद भी उड़ गई होगी वहां के बुद्धिजीवियों की। अब अमेरिका ने भी स्पष्ट कर दिया है कि चीन के साथ युद्ध की स्थिति में वो भारत का साथ देने के लिए तैयार है। इस दौरान जापान समेत इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के अहम लोकतांत्रिक देशों का साथ भी भारत को मिलेगा। दरअसल डोकलाम (सिक्किम-भूटान सीमा) से लेकर हिंद-प्रशांत महासागर में चीन के बढ़ते आक्रामक रवैये को लेकर अमेरिका भी गुस्से में है, उपर से चीन बार बार अस्पष्ट तौर पर अमेरिका को ऊँगल भी कर रहा है।

गौरतलब है बंगाल की खाड़ी में मालाबार के नाम से अमेरिका, भारत और जापान की नौ सेना के बीच अभी तक का सबसे बड़ा नौ सैनिक अभ्यास चल रहा है। इसी में शामिल दुनिया का सबसे बड़ा विमान वाहक जहाज अमेरिकी निमिट्ज भी है।भारत के साथ अभ्यास के कारण उत्साह से भरपूर निमिट्ज के कमांडर रियर एडमिरल विलियम बायर्नी ने तो ये तक कह दिया कि – “इस अभ्यास का एक मकसद यह भी है कि अगर हिंद महासागर में कोई अंतरराष्ट्रीय संकट पैदा होता है तो जापान व अमेरिका मदद के लिए आगे आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि मालाबार से हम एक दूसरे को और बेहतर तरीके से समझने लगे हैं ऐसे में किसी भी सामुद्रिक संकट में हम और बेहतर सामंजस्य के तहत काम कर सकते हैं।”

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चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के कमांडर का यह बयान अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन इस पूरे समुद्री क्षेत्र में बहुत तेजी से अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। मालाबार अभ्यास की शुरुआत भारत व अमेरिका के बीच हुई थी लेकिन अब उसमें जापान को भी जोड़ा जा चुका है। और संभवत: अगले साल से आस्ट्रेलिया भी इसमें शामिल होगा। वहीं भारत के दौरे पर आई आस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री जूली बिशॉप ने भी हिंद महासागर में भारत को निर्विवाद तौर पर लीडर कह कर अपनी मंशा साफ कर दी है कि चीन की लगातार बढ़ती नौ सैनिक गतिविधियों को लेकर सभी लोकतांत्रिक देश चिंतित है। आस्ट्रेलिया विदेश मंत्री बिशॉप ने पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भी मुलाकात कर कहा कि इस समुद्री क्षेत्र में स्थायित्व के लिए सभी लोकतांत्रिक देशों (जापान, आस्ट्रेलिया, भारत व इंडोनेशिया) को एकजुट होना चाहिए, आखिर ये चारों देश इस क्षेत्र के सबसे बड़े देश भी हैं।

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